धुआ-धुआ हो उठे नज़ारे शायद
आँखे भर आई हैं
साँस इतनी बोझिल है
की खुद से ही घबराई है
दिल इतना भारी है इसपे
की ग़म की बदली छाई
काँटे हँसते हैं फूलों पर
मौसम भी हरजाई है
रूठ गया हमदम ऐसे
रूठी सारी खुदाई है
मुझे छोड़ कर चल दिया है जो
वो मेरी ही परछाई है!
Thursday, April 30, 2009
Wednesday, April 29, 2009
संगम
जाने क्यों एक ऐसा संगम है
और मै हूँ तन्हा वो भी है तन्हा,
और हैं ये फासले हमारे बीच का
और ये इंतज़ार मेरी नींदों का
और उसके ख्वाबों का,बहकी गुनाहों का
इन महकती फिजाओं में,बहकती अदाओं में
ये अनकही सी अनसुनी सी आरजू मेरे दिल की
जिसे हसरत है उन्हें पाने का ये एहसास लिए
जो हर वक़्त हर लम्हा उसे ही धुन्दती हैं
जाने क्यों एक ऐसा संगम है
और मै हूँ, तन्हा वो भी है तन्हा,
इस उमड़ते हुए जज्बातों के सैलाब में
इस बहकते हुए भावनाओ के आगोश में
मेरी खामोश धड़कने न जाने क्यों
हर पल हर क्षण उसे ही पुकारती हैं
जाने क्यों एक ऐसा संगम है
और मै हूँ तन्हा वो भी है तन्हा,
इन बढती हुई चाहतो की वादियों में
इन महकती हुई फूलो की गुलिस्तान में
उनकी ही खुशबू की एहसास छाई है
ना जाने क्यों ये बेताबियाँ और बेचैनी
उस संगदिल के प्यार की आस लगाये बैठा है
क्यों ये अंशू थमने का नाम नहीं लेते
उस अजनबी की राह को तकते हैं रहते
क्यों ये लाचार दिल बस ये जिद किये बैठा है
हर पहर हर शांझ बस वो ही वो नजर आता है
जाने क्यों एक ऐसा संगम है
और मै हूँ तन्हा वो भी है तन्हा,
ना जाने क्यों ये मौसम इतना हसीन हो चला है
पल पल याद दिलाये लम्हों का साज छेड़ चला है
आखिर क्यों ये तन्हाईयाँ इस मोड़ पे रास नहीं आती
हर लम्हा मेरी धड़कन एक ही फरियाद किये जाती है
आखिर क्यों ये दिल की दस्तक उन्हें अनसुनी किये जाती है
जाने क्यों एक ऐसा संगम है
और मै हूँ तन्हा वो भी है तन्हा!
और मै हूँ तन्हा वो भी है तन्हा,
और हैं ये फासले हमारे बीच का
और ये इंतज़ार मेरी नींदों का
और उसके ख्वाबों का,बहकी गुनाहों का
इन महकती फिजाओं में,बहकती अदाओं में
ये अनकही सी अनसुनी सी आरजू मेरे दिल की
जिसे हसरत है उन्हें पाने का ये एहसास लिए
जो हर वक़्त हर लम्हा उसे ही धुन्दती हैं
जाने क्यों एक ऐसा संगम है
और मै हूँ, तन्हा वो भी है तन्हा,
इस उमड़ते हुए जज्बातों के सैलाब में
इस बहकते हुए भावनाओ के आगोश में
मेरी खामोश धड़कने न जाने क्यों
हर पल हर क्षण उसे ही पुकारती हैं
जाने क्यों एक ऐसा संगम है
और मै हूँ तन्हा वो भी है तन्हा,
इन बढती हुई चाहतो की वादियों में
इन महकती हुई फूलो की गुलिस्तान में
उनकी ही खुशबू की एहसास छाई है
ना जाने क्यों ये बेताबियाँ और बेचैनी
उस संगदिल के प्यार की आस लगाये बैठा है
क्यों ये अंशू थमने का नाम नहीं लेते
उस अजनबी की राह को तकते हैं रहते
क्यों ये लाचार दिल बस ये जिद किये बैठा है
हर पहर हर शांझ बस वो ही वो नजर आता है
जाने क्यों एक ऐसा संगम है
और मै हूँ तन्हा वो भी है तन्हा,
ना जाने क्यों ये मौसम इतना हसीन हो चला है
पल पल याद दिलाये लम्हों का साज छेड़ चला है
आखिर क्यों ये तन्हाईयाँ इस मोड़ पे रास नहीं आती
हर लम्हा मेरी धड़कन एक ही फरियाद किये जाती है
आखिर क्यों ये दिल की दस्तक उन्हें अनसुनी किये जाती है
जाने क्यों एक ऐसा संगम है
और मै हूँ तन्हा वो भी है तन्हा!
लड़की
कोमल ह्रदय वाली है वो
ममता की मूरत है वो,
खुद को अंधियारे में रखकर
औरो को उजाले दिलाती!
मानो वो मजधार में रहकर
औरो को साहिल दिलाती!
कोमल ह्रदय वाली है वो,
ममता की मूरत है वो!
फूलों सी नाजुक लगती है वो,
किन्तु कांटो की सेज में रहती है वो,
जन्म से लेकर मृत्यु तक,
औरों के गम का सहभागी बनती है वो!
फिर भी जीवन के इस लम्बे राह में,
खुद को तन्हा पाती है वो!
कोमल ह्रदय वाली है वो
ममता की मूरत है वो,
माँ-बाप और भाई -बहन पर,
स्नेह की सुधा बरसाती है वो,
खुद को प्यासी रखकर वो,
आंशुओ का विश पी-पीकर,
औरों की तृष्णा मिटाती है वो,
कोमल ह्रदय वाली है वो,
ममता की मूरत है वो!
धरती पर पाऊ रखते ही वो,
अवहेलना व् तिरस्कार पाती!
दुःख,दर्द और गम के साये में पली-बढ़ी वो,
बचपन से प्रेम का रस-राग सुनाती
यौवन की सीधी में चढ़ते ही वो,
खुद को दुनिया की नजरों से बचाकर
सीता-सावित्री कहलाती है वो!
कोमल ह्रदय वाली है वो
ममता की मूरत है वो,
क्षण में दुर्गा क्षण में चंडी,
बनकर शत्रुओ को खदेड़ती है वो,
शक्ति का रूप लेकर अपराजिता बनती है वो,
पाप असत्य व् जुल्मो का सर्वनाश करती,
दया-करुना व् ममता न्योछावर करती!
कोमल ह्रदय वाली है वो
ममता की मूरत है वो,
जीवन की अन्तिम बेला तक,
सतायी गयी वो अबला,
साँझ-सवेरे और रात फ़र्ज़ निभाती रहती,
पता नहीं दर्द की मरी वो,
संसार की जुल्मो को सहकर,
कब खुद को इन सब से मुक्त करेगी
कोमल ह्रदय वाली है वो
ममता की मूरत है वो!
कब सुनेगी दुनिया उसकी करह को
कब समझेगी उसकी मावता को
क्या यही है जीवन उसका
जो हर लम्हा दबायी जाती
कोमल ह्रदय वाली है वो,
ममता की मूरत है वो!
यह थी मेरी जुबानी,
और एक लड़की की दर्द भरी कहानी!
ममता की मूरत है वो,
खुद को अंधियारे में रखकर
औरो को उजाले दिलाती!
मानो वो मजधार में रहकर
औरो को साहिल दिलाती!
कोमल ह्रदय वाली है वो,
ममता की मूरत है वो!
फूलों सी नाजुक लगती है वो,
किन्तु कांटो की सेज में रहती है वो,
जन्म से लेकर मृत्यु तक,
औरों के गम का सहभागी बनती है वो!
फिर भी जीवन के इस लम्बे राह में,
खुद को तन्हा पाती है वो!
कोमल ह्रदय वाली है वो
ममता की मूरत है वो,
माँ-बाप और भाई -बहन पर,
स्नेह की सुधा बरसाती है वो,
खुद को प्यासी रखकर वो,
आंशुओ का विश पी-पीकर,
औरों की तृष्णा मिटाती है वो,
कोमल ह्रदय वाली है वो,
ममता की मूरत है वो!
धरती पर पाऊ रखते ही वो,
अवहेलना व् तिरस्कार पाती!
दुःख,दर्द और गम के साये में पली-बढ़ी वो,
बचपन से प्रेम का रस-राग सुनाती
यौवन की सीधी में चढ़ते ही वो,
खुद को दुनिया की नजरों से बचाकर
सीता-सावित्री कहलाती है वो!
कोमल ह्रदय वाली है वो
ममता की मूरत है वो,
क्षण में दुर्गा क्षण में चंडी,
बनकर शत्रुओ को खदेड़ती है वो,
शक्ति का रूप लेकर अपराजिता बनती है वो,
पाप असत्य व् जुल्मो का सर्वनाश करती,
दया-करुना व् ममता न्योछावर करती!
कोमल ह्रदय वाली है वो
ममता की मूरत है वो,
जीवन की अन्तिम बेला तक,
सतायी गयी वो अबला,
साँझ-सवेरे और रात फ़र्ज़ निभाती रहती,
पता नहीं दर्द की मरी वो,
संसार की जुल्मो को सहकर,
कब खुद को इन सब से मुक्त करेगी
कोमल ह्रदय वाली है वो
ममता की मूरत है वो!
कब सुनेगी दुनिया उसकी करह को
कब समझेगी उसकी मावता को
क्या यही है जीवन उसका
जो हर लम्हा दबायी जाती
कोमल ह्रदय वाली है वो,
ममता की मूरत है वो!
यह थी मेरी जुबानी,
और एक लड़की की दर्द भरी कहानी!
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